लोगों ने किसी को पकड़ा है किसी को छोड़ा है,
किसी के पास रहे हैं किसी से दूर रहे हैं,
किसी के लिए अपने हुए किसी के लिए पराए हुए,
किसी से रिश्ते होने थे किसी के लिए अधूरे हैं,
किसी पर विश्वास करने वाले किसी पर अवैध विश्वास प्रकट हुए,
फिर भी लोगों अपना काम किया,
इंसानों को जाति के नाम किया,
किसी को आजाद किया, किसी को जिद से अहसानों की जिदंगी में धक्का दे दिया,
कितने बरबाद हुए हैं मेरे जाति में फंसे इंसान,
गरीबों की ग़रीबी जाति है,
इनकी गुलामी जाति है,
इस तड़प में जाति ने, लोगों को जीने ना दिया, लोगों के द्वारा,
कुछ धूल खाए पन्नों ने,
इंसानों को संसाधनों को सही बांटने नहीं दिया, ना जीने दिया, ना सम्मान का काम दिया।।
समय के साथ सरकारी ढ़ंग क्रूर होता जा रहा हैं।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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