एक पेड़ लगाकर तुमने, किसी पर एहसान नहीं किया
बताओ,परींदों के गीत का कर्ज, तुम कैसे चुकाओगे?
मखमली,कोमल, रेशमी,मन को सुकून देने वाली,
शीतल छांव के प्रीत का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे?
डालियों में बंध जाते हैं, भीगते झूले जो सावन की,
पावस की मीठी गीत का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे!
मिलती रहती है सदा रहेगी, पीढ़ियों से पीढ़ियों तक,
सांसों को शुद्ध समीर का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे!
धरती की बंजरता को,रोका जड़ों से जकड़ जकड़कर,
हरियाली से फैली संगीत का कर्ज, तुम कैसे चुकाओगे!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







