Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

कैद मे है बुलबुल

कल तक हँसती-खेलती जी रही थी वो,
आज कैद में है बुलबुल।
कल तक अपने ख़्वाबों में पंख लगा आसमां में उड़ रही थी वो,
आज पाँव के नीचे ज़मीं भी नहीं है।
कल तक अपने प्रीतम के आगोश में जाने को तड़प रही थी वो,
आज प्रीतम तो है पर प्रेम का आगोश नहीं है।
कल तक मायके के वृक्ष पर बैठी चिड़िया सी चहक रही थी वो,
आज ख़ामोश है, दिल से निकलती कोई आवाज़ नहीं है।
कल तक छत की मुंडेर पर बैठी कोयल सी कुहक रही थी वो,
आज गीत तो है पर कोई साज़ नहीं है।
कल तक अपनों की भीड़ में बहुत खुश लग रही थी वो,
आज भीड़ तो है पर कोई साथ नहीं है।
आज तन्हा खड़ी सोच रही है वो…
क्या कैद में है बुलबुल।
— सरिता पाठक


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

+

पवन कुमार "क्षितिज" said

बहुत गहराई से समझ के सटीक लिखा आपने 👌👌👌

सरिता पाठक replied

धन्यवाद पवन भईया जी सादर प्रणाम 🙏🙏

Lekhram Yadav said

लङकी की शादी के बाद की स्थिति का बहुत खूबसूरत चित्रण करती एक खूबसूरत रचना, आपको सादर नमस्कार।

सरिता पाठक replied

धन्यवाद यादव भईया जी 🙏🙏

सुप्रिया साहू said

बहुत खूबसूरत रचना सर मैम 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

सरिता पाठक replied

धन्यवाद सुप्रिया बहन ❤️🙏

वन्दना सूद said

bahut deepth hai aapki रचना में

सरिता पाठक replied

धन्यवाद वंदना जी ❤️🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! बेहद गहराई है इस रचना में! निहायत ही ख़ूबसूरती से लिखा है आपने, सरिता जी! लाजवाब! 👌👏❤️🙏😊

सरिता पाठक replied

परवेज़ जी को आदाब 🙏रचना मे मर्म और उसकी गहराई को समझने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 🙏🙏

कृष्णा शर्मा said

बहुत हीं खूबसूरत रचना 👏👏
सादर प्रणाम 🙏

सरिता पाठक replied

धन्यवाद कृष्णा जी सादर prna❤️🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

चमन में खिलती खूशबू बिखेरती फूल न जाने कब तूफानों टकरकार पंखुड़ी पंखुड़ी बिखर जाती है। नारी की हृदय की पीड़ा का मर्मस्पर्शी चित्रण 🙏🌹🌹

सरिता पाठक replied

धन्यवाद मनोज भईया जी भईया जी आपसे एक विनती करना चाहती हूँ, मेरी बेटी प्रार्थना पाठक ने लिखन्तु पर एक लेख लिखा है समय मिले तो उसे पढ़िए जरूर, आदरणीय भईया जी को सादर प्रणाम 🙏🙏

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन