(बाल कविता )
इसीलिए है भाती गर्मी
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छुट्टी लेकर आती गर्मी ।
इसीलिए है भाती गर्मी ।।
काम नहीं बस्ते कॉपी का
केवल मौज मनाती गर्मी ।
मौसा फूफा नाना के घर
सबको सदा घुमाती गर्मी।
अमराई में खेल-खेलते
मीठे आम खिलाती गर्मी।
दोपहरी में मामा जी से
कुल्फी भी दिलवाती गर्मी ।
नदी नहर तालाबों में जा
छप-छप रोज कराती गर्मी।
नहीं समय का बंधन कोई
जी भर हमें सुलाती गर्मी ।
लस्सी छाछ पना शरबत भी
हर दिन हमें पिलाती गर्मी।
बचपन का अनमोल खजाना
मई-जून में लाती गर्मी ।
पारा बढ़ता पर बच्चों को
बिल्कुल नहीं सताती गर्मी ।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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