मोहब्बत करने वाले,
तबाही तो हुई ना,
दिल के इल्ज़ाम लगाते फिरते,
वहम करते फिरते,
अपनी कब्र में कमी है,
तो जिंदगी तो खत्म हुई ना,
अपनी कब्र में जिंदगी की कमी है,
दूरियां तो पास हुई ना,
अपना ही अपने का पराया है,
अपना अपने को गुलाम रखकर,
दूसरे की गुलामी करता है,
खुद के अपने की खुशी से जलने वाले,
जबरन दूसरे गुलामी करते,
उसके लिए बेवजह खुशी हुई ना,
क्या कर लेगा इश्क़ करके,
मिलकर बातें करके,
उखाड़ने को तुझे बस अपनी जड़ें मिली ना,
तुझे रास ना आया लोगों का आस पास रहना,
उन्हें दूर करने,
षड्यंत्र और जलन की खुजली तो तुझे हुई ना,
शर्म नहीं है,
क्यों होगी,
हर बात तुझे जो मजाक लगी ना।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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