आज हमको हर बात पे रोना आया,
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
गेरों ने सितम किये थे हम पे बहुत।
आज अपनों ने भी घाव दिये दिल पे बहुत।
उन रिसते हुए घावों से उठती टीस पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
लब ख़ामोश थे, आँखों में था समुन्दर गहरा,
बहते हुए अश्कों की बरसात पे रोना आया।
आज हमें हर बात पे रोना आया।
अब तो जीने की तमन्ना ही नहीं है बाकी,
सांसों के चलने की आवाज़ पे रोना आया।
जिन्दा क्यों हूँ, इसी बात पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
हर पल ही गर्दिश में सितारे रहे अपने।
सोचा था अपनी तकदीर का सितारा भी चमकेगा कभी।
अपनी किस्मत में मिले अँधेरों की सौगात पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
आज हमको हर बात पे रोना आया।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







