Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

जीने की तमन्ना

आज हमको हर बात पे रोना आया,
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
गेरों ने सितम किये थे हम पे बहुत।
आज अपनों ने भी घाव दिये दिल पे बहुत।
उन रिसते हुए घावों से उठती टीस पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
लब ख़ामोश थे, आँखों में था समुन्दर गहरा,
बहते हुए अश्कों की बरसात पे रोना आया।
आज हमें हर बात पे रोना आया।
अब तो जीने की तमन्ना ही नहीं है बाकी,
सांसों के चलने की आवाज़ पे रोना आया।
जिन्दा क्यों हूँ, इसी बात पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
हर पल ही गर्दिश में सितारे रहे अपने।
सोचा था अपनी तकदीर का सितारा भी चमकेगा कभी।
अपनी किस्मत में मिले अँधेरों की सौगात पे रोना आया।
कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया।
आज हमको हर बात पे रोना आया।
— सरिता पाठक


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

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सुप्रिया साहू said

जब रिश्ता टूटता है तो हर जगह पर ज़ख्म होते हैं और वो ज़ख्म इतने गहरे होते हैं कि हम नहीं चाहते कि हमें रोना आए फिर भी इन आंखों से आंसू कहते हैं मुझे गिरने दो और अपना मन हल्का कर लो, बहुत खूबसूरत रचना मैम 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏। आपने मेरी रचना नहीं पढ़ी है शायद कृपया मेरी रचना को जरूर पढ़ना🙏🙏।

सरिता पाठक replied

धन्यवाद सुप्रिया बहन स्नेह युक्त नमस्ते ❤️🙏

Lekhram Yadav said

ये जरूरी नहीं है कि हर बार रिश्ता टूटने पर ही दिल टूटे या दर्द का अनुभव हो, कभी-कभार ऐसी बात भी दिल को चुभ जाती है, जिसकी अपेक्षा नहीं होती, और ये बात उनके द्वारा कही जाती है जो खुद के अपने होते हैं,चाहे वह, मा-बाप, भाई-भाभी या बहन, पति-पत्नी, बेटा-बेटी या किसी अन्य निकट संबंधी द्वारा कही जा सकती है। ऐसी बातों से दर्द ज्यादा भावनात्मक और असहनीय होता है। लेकिन हालात चाहे कैसे भी हों सहन करना पङता है, इन्हीं बातों की शानदार अभिव्यक्ती करती एक खूबसूरत रचना, आपको सादर नमस्कार।

सरिता पाठक replied

धन्यवाद बड़े भईया जी को सादर प्रणाम 🙏

पवन कुमार "क्षितिज" said

"sahir saab" की पंक्ति के साये में आपने जो अपने दिल के जज़्बात लिखे हैं वो कमाल है..दर्द का बयाँ सीधा और सपाट है, कोई बनावट नहीं...👌👌

सरिता पाठक replied

धन्यवाद भईया जी सादर प्रणाम 🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

लब खामोश थे, आंखों में था गहरा समंदर। ज़माने की बेरूखी को चुपचाप सह लेने का पीरमयी एहसास।"जो मेरे आंसुओं का तलबगार होगा,गौर से देखो, वो मेरा रिश्तेदार होगा।"सरिता बहन आजकल सबसे ज्यादा तकलीफ़ अपने रिश्तेदार ही देते हैं। आपकी रचना की हर पंक्ति में ऐसी ही पीड़ा झलक रही है। सादर प्रणाम 👌🙏🙏

सरिता पाठक replied

धन्यवाद भईया जी को सादर प्रणाम 🙏

कृष्णा शर्मा said

बहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏👏👏
हर पंक्ति में हर लफ़्ज़ में दर्द झलकता हुआ 👏👏👏
बहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏
सादर प्रणाम 🙏☺️

सरिता पाठक replied

धन्यवाद कृष्णा जी, सादर प्रणाम 🙏

सरिता पाठक replied

धन्यवाद कृष्णा बहन को प्यार भरा नमस्ते 🙏

अनिल भारद्वाज एडवोकेट said

बहुत ही भावपूर्ण सुंदर और प्रतीकात्मक रचना। बधाई आपको। इसी तरह श्रेष्ठ रचनाएं लिखती रहें। सादर अभिवादन।

सरिता पाठक replied

आदरणीय अनिल सर जी को सादर प्रणाम और धन्यवाद 🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

सरिता बहन आजकल आपकी रचना पढ़ने को नहीं मिल रहा है। क्या बात है,आप सपरिवार कुशल रहें!! सादर नमस्कार 🌹🙏

सरिता पाठक replied

आदरणीय मनोज भईया जी को सादर प्रणाम 🙏कुछ पारिवारिक समयासों मे फसी हुई हूँ और स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा है इसलिए अभी रचनाएँ नहीं भेज पा रही हूँ, जल्द ही मेरी रचनाएँ आपको पढ़ने मिलेंगी 🙏

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