""जान कहते हो जताते क्या रहते हो,
क्या कहते हो बताते क्या रहते हो,
बह ना जाऊं मैं क्यों बहारें लाए हो,
काजल में छुपे हो अंधेरा क्या करते हो, जान कहते हो जताते रहते हो,
खुश्बू नहीं लेता हूं, मैं तुम्हारी सांसें लेता हूं, पास रहोगे तो अपनी भी सांसें लेता हूं, अश्कों से ना उलझों, ये तुम्हें इश्क़ दे देंगे, बांहों में ना रहो तुम अपनी,
दिल तुम्हारा अपनी ही जान ले लेगा,
नशा रखो तुम अपना देखो तुम्हें खुद से इश्क़ हो जाएगा,
आशिकों में तौबा हाय का ऐलान जाएगा, हुसन अदा का इनाम रखते हो,
बेपरवाह मौसमों का इलाज रखते हो,
जान कहते हो जताते क्या रहते हो,
प्यार कहते हो सताते क्या रहते हो।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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