"जान जाना जहां"
कुदरत की खामोशी दिखी है मुझे भरे बाजारों में,
इंसान जिसके पास सबकुछ हो,
इंसान जिसके पास कुछ ना हो,
फिर क्या बचा जो इंसान हो,
महफ़िल शोहरत बेचैनी खानदानी,
क़दर जिस्म बरकत दुआ मालूम हुआ,
हुजूर जान जंहा जाना जानां ज़ुल्म फुर्सत,
खरीदार मिला बिक गयी जवानी।
साँसें भी अनजान है मुझसे,
फिर भी उसने आना जाना याद रखा।
वो हैं कहाँ कोई खबर नहीं,
उसे ना जाने ऐसा क्या मिल गया।
मुद्दतों में तो तुमने मरने की इबादत दी है,
जिद्द तो ये है कि यहाँ से चला जाऊँ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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