एक तमन्ना पूरी करने के लिए
आहुति खुद की दी उसके लिए
अपनी छांव से दहलीज सजाई
खुद जली उफ न की उसके लिए
एक बूँद न मिली प्यास बुझाने को
मैं सूखी धरती जैसी तड़पती रही
हृदय में कांटों का जंगल बस चुका
आहें हवा में उड़ी अदृश्य पीड़ा रही
मैंने दिया सब बदले में क्या मिला
त्याग की छांव में अँधेरी रात मिली
जो भी सपने सजाये अभिशाप बने
खुद को भस्म करने की सौगात मिली
एक एक हड्डी जल रही राख होने को
कोई और न जला 'उपदेश' मेरे लिए
मेरी राख से दीप जलाया द्वार अपने
औरत होने की सजाए बनी मेरे लिए
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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