जान-ए-मन जान-ए-जान तू छुपी है कहाँ,
अब हवा में कहाँ तेरा इश्क़ बता,
जान-ए-मन जान-ए-जान तू भी है कहाँ,
मेरी रूहाई तेरी रिहाई जश्न मनाने लगी,
तेरी रूह की महक मेरे बदन में घर बनाने लगी,
फासले थे हमारे तुम्हारे बस दिखें नजारों में,
हम दोनों पास ही थे दोनों की नजरों में,
देखो कुछ भी मगर असर ना होने दो,
दुहाई दे रहा हूं ये रिश्ता खोने ना दो,
सोच लो तुम्हें चाहत है सपनों की,
गुज़ारिश है नींद ना मिले सपनों की,,
अब बताऊं तुम्हें मैं हूँ कहाँ,
मैं मन की आवाज ही हूं,
जो तुम्हें खुलकर कहती हैं।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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