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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

जख्म जो दिये थे

ज़ख्म जो दिए थे
ज़माने ने किश्तों में
गुथ गुंथ सारे हम
हार बना लिए

क्या मिला है हमसे
अरे नफरत वालों
तुमसे सीख जिंदगी
गुलज़ार बना लिए

दरिया में मोहब्बत के
कुछ लोग डूब डूबकर
अपने मौसमों को
बहार बना लिए

रहमत की भीख तो
इक " वही" देता है
पर चंद लोग इस पर
अधिकार बना लिए

"यकीन" की नाव पर
सवार कुछ लोग
हाथों को ही अपना
पतवार बना लिए।।


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (9)

+

जयश्री विलास जोधंळे said

यकीन के नाम पर सवार कुछ लोग हा तुमको ही अपना परिवार वाह! बहुत सुदंर रचना

जयश्री विलास जोधंळे said

गलती से पतवार कि जगह परिवार हो गया

सरिता पाठक said

अति सुन्दर रचना आप जब भी लिखते हैं ह्रदय स्पर्शी लिखते हैँ हर पंक्ति लाजबाब भईया जी सादर प्रणाम 👌🙏

सुप्रिया साहू said


क्या मिला है हमसे
अरे नफरत वालों
तुमसे सीख जिंदगी
गुलज़ार बना लिए...।।
क्या खूब लिखा है आपने, अगर इस तरफ़त करेगा तो जिंदगी को गुलज़ार बनानी ही पड़ेगी, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

आप सभी को सादर प्रणाम करता हूं 🙏🌹🙏

ललित दाधीच said

क्या बात है 🎉🎉 अद्भुत गज़ब गजब, जे बात, मोहब्बत के हृदय में भी तंज़ कस दिए आपने तो, वाह वाह लाजवाब, बेमिसाल, सुपर डुपर सीट🎉🎉🙂🙂❤️❤️❤️💐💐🎯🎯🔥🔥🙏🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

यक़ीन की नाॅंव पर सवार कुछ लोग!
हाथों को ही अपना पतवार बना लिए!!
वाह! वाह! वाह! बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! क्या कमाल का लिक्खा है आपने, मनोज जी! ग़ज़ब की कविता! बेहतरीन! बेहतरीन! लाजवाब! बे-मिसाल! आदाब, मनोज जी! 👌👌👏👏❤️🙏🙂

वन्दना सूद said

वाह वाह sir क्या बात बहुत खूब बेहतरीन रचना 👌👌👏👏🙏🙏मजा आ गया इतनी सुंदर पंक्तियाँ पढ़ कर

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

आदरणीय परवेज जी, वन्दना मेम आप दोनों को सादर प्रणाम करता हूं 🙏🌹 मेरी रचना आपके दिल तक पहुंची, ये मेरे लिए अनमोल है। हमेशा ऐसे ही अपनापन बनाए रखिए 🙏🙏🙏

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