ज़ख्म जो दिए थे
ज़माने ने किश्तों में
गुथ गुंथ सारे हम
हार बना लिए
क्या मिला है हमसे
अरे नफरत वालों
तुमसे सीख जिंदगी
गुलज़ार बना लिए
दरिया में मोहब्बत के
कुछ लोग डूब डूबकर
अपने मौसमों को
बहार बना लिए
रहमत की भीख तो
इक " वही" देता है
पर चंद लोग इस पर
अधिकार बना लिए
"यकीन" की नाव पर
सवार कुछ लोग
हाथों को ही अपना
पतवार बना लिए।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







