जा तुझे आजाद किया
तेरी नफरत को अपना नाम दिया
तेरे खातिर भुलाई थी पहली मंजिल
मैंने पहली मंजिल तेरा नाम दिया।
जा तुझे आजाद किया
जा तुझे आजाद किया....
वैसे तो मैं बहुत हूं व्यस्त
दिन भर रहता हूं अपनी मस्ती में मस्त
जैसे-जैसे आती है रात मेरे पास
हार जाता हूं खुद की यादों से
फिर तुम याद आते हो जबरदस्त
ख़ैर छोड़ो जबरदस्ती में मैंने,
वाह! क्या प्यार किया
तेरे साथ बिता हर पल,
फिर मैंने याद किया
जा तुझे आजाद किया
जा तुझे आजाद किया....
मेरी तो दुनिया लुट गई
खुशी चली गई किसी और शहर
अब मैं खुद के काबू में नहीं रहता
पागल रहता हूं हर पहर
पहला पहर यादों में डूबा
दूसरा पहर एहसासों में डूबा
तीसरा पहर कोशिशो में डूबा
चौथा पहर बंदीशो में डूबा
साथ ही मेरे भावनाओं का समंदर डूबा
खैर छोड़ो खुद को डुबाने से मेरा क्या,
वाह! क्या प्यार किया
खुद को बर्बाद किया, फिर भी मैंने याद किया
जा तुझे आजाद किया
जा तुझे आजाद किया......
ख्वाहिशों के बंदिश में
तुझे पाने की ख्वाहिशों में
मैं लटक रहा बीच डगर में
मुझे तू चाहिए था हर मंजिल में
अगर मेरी पहली मंजिल पूरी होती,
तो मैं कहीं और होता
तेरे शहर में, तेरे साथ होता
तेरे शामों में, तेरे साथ होता
तेरी रातों में, तेरे साथ होता
बन जाता मैं तेरा समंदर
अगर तेरा घर समंदर के पास होता
मर जाता मैं तेरे खातिर
जपता तेरा नाम होता
खैर छोड़ो मेरे ख्वाहिशों का बाजार
मैं तो व्यापारी था व्यापार किया
वाह! क्या मैंने प्यार किया
जा तुझे आजाद किया
जा तुझे आजाद किया.........
And continue..........
- #Seth Kundan


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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