तेरी सोच पर मुस्कुराता दूर निकल गया।
सर्दियों से गर्मी आई बेवजह पिघल गया।।
अब लौटना चाहता मगर मुश्किल में जान।
माफ़िक होने की राह में सबब बदल गया।।
शौकीन मैं रहा तुमको करीब से देखने का।
पढ़ाई लिखाई नौकरी में समय निकल गया।।
किसी ने कहा नही अपने आप सोच लिया।
खुद पर काबू करते-करते दूर निकल गया।।
इश्क तेरे बचपने से गया नही मेरा 'उपदेश'।
मगर कशमकश करते बचपना निकल गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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