दफ़्न हैं जो राज़,
उनको दफ़्न रहने दीजिए।
जो कहे 'श्रीराम' या 'अल्लाह',
कहने दीजिये।
मत कोई अवरोध
पैदा कीजिए उस धार में,
जो नदी की धार है,
वो धार बहने दीजिए।
जाति, भाषा, धर्म,
संस्कृति की खड़ी दीवार हैं,
उन सभी दीवार को तो
आज ढहने दीजिए।
बस लड़ाई, खून- खच्चर है
यहाँ इतिहास में,
आज फ़िर से आदमी का
ख़ूँ ना बहने दीजिए।
सोचिए कल की,
उसे कैसे बनाएँ बेहतरीन,
जो हुआ इतिहास में,
इतिहास रहने दीजिए।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







