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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

इश्क़ में हिज़्र की न कभी मौज़ आए

वो नहीं चाहता मेरी मौत बेमौत आए
कोशिश हैं मेरा दिल दर्द सें लौट आए

उसे जो चाहिए था उसने रख़ लिया
हम बचा-कुचा समेटकर लौट आए

वक़्त गुज़ारने का जरिया भी न रहा
चाहत ये हैं कि अब बस मौत आए

दुःख के दर-ओ-दीवार में उलझ गए
सुःख अब बनकर इसकी सौत आए

माँ कहती हैं,कहते हैं उनको कहने दे
तू सोना हैं सोने में कभी न खोट आए

हर कोई वार करने में माहिर निकला
ऐ राम बस दिल पे न गहरी चोट आए

राम कुछ ऐसा कर सुकूँ मिले मन क़ो
वो माफ़ी माँगने चलकर दंडोत आए

जान निकल जाती हैं महबूब दूर हों तो
इश्क़ में हिज़्र की न कभी मौज़ आए

कृष्णा ने चाहा ही नहीं कभी जीना ही
हर रोज़ लगता हैं कि दर्द न बेमौत आए...
-कृष्णा शर्मा




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

हृदय की असीम वेदना को दर्शाती आपकी रचना की हरेक पंक्ति के शब्द शब्द में दर्द भरे मन की मौन चीख तन के अंदर गूंज गूंजकर नस नस को हिला रही है।दिलासाएं काम नहीं आ रहीं हैं।पीड़ा की पराकाष्ठा से परिपूरित हृदयस्पर्शी कविता 👌👌🙏 उठे अगर तूफान, नजरों के सामने, तो,आंख दिखाने में हर्जा क्या है,मौत आती है, जिंदगी देने के लिए तो आजमाने में हर्जा क्या है। हिम्मत और अपनी मौलिकता से ज़माने से लड़ने की हिम्मत तो एक जख्मी शायरा में ही हो सकती है। सादर नमस्कार 🌹🙏🙏

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