वो नहीं चाहता मेरी मौत बेमौत आए
कोशिश हैं मेरा दिल दर्द सें लौट आए
उसे जो चाहिए था उसने रख़ लिया
हम बचा-कुचा समेटकर लौट आए
वक़्त गुज़ारने का जरिया भी न रहा
चाहत ये हैं कि अब बस मौत आए
दुःख के दर-ओ-दीवार में उलझ गए
सुःख अब बनकर इसकी सौत आए
माँ कहती हैं,कहते हैं उनको कहने दे
तू सोना हैं सोने में कभी न खोट आए
हर कोई वार करने में माहिर निकला
ऐ राम बस दिल पे न गहरी चोट आए
राम कुछ ऐसा कर सुकूँ मिले मन क़ो
वो माफ़ी माँगने चलकर दंडोत आए
जान निकल जाती हैं महबूब दूर हों तो
इश्क़ में हिज़्र की न कभी मौज़ आए
कृष्णा ने चाहा ही नहीं कभी जीना ही
हर रोज़ लगता हैं कि दर्द न बेमौत आए...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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