माना कि तू इतना भी ज़ाहिल नहीं,
मगर अफसोस की तेरी खुद की किस्मत तुझे हासिल नहीं,
अब ऐसे में क्या ही कहें हम तुझे,
जा माफ़ किया हमने वैसे भी तू हमारे इंतक़ाम के क़ाबिल नहीं..!
---कमलकांत घिरी.✍️

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
माना कि तू इतना भी ज़ाहिल नहीं,
मगर अफसोस की तेरी खुद की किस्मत तुझे हासिल नहीं,
अब ऐसे में क्या ही कहें हम तुझे,
जा माफ़ किया हमने वैसे भी तू हमारे इंतक़ाम के क़ाबिल नहीं..!
---कमलकांत घिरी.✍️
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम