मालूम हर बात हर चीज़ उसे,क्या-क्या रोग लगा हैं मुझे
उसे लगता है वसवास-ए-फ़िक्री का मनोरोग लगा है मुझे
हम तों मरज़-ए-क़ल्ब पाल बैठे उसकी मुहब्बत के ग़म में
उसको लगता हैं यूँ ऐसे जल्दी मरने का शौक चढ़ा हैं मुझे
ग़र ये हर्फ़ हों समझा ही नहीं, मतलब वक़्त जाया किया
उस पऱ पड़े दिल के बोझ का आज़ अहसास हुआ हैं मुझे
अग़र कुछ ख़ोज-ख़बर होती कैसे-कैसे ज़ख्म दिए हमनें
तों उसके एक-एक ज़ख्म का बड़ा भारी पाप पड़ा हैं मुझे
कृष्णा तू फ़क़त हाथ ही मलती रही भीगी आँखे लेकर के
ज़िन्दगी गई,खुशियाँ गई लगता हैं के भारी बद्दुआ हैं मुझे...
-कृष्णा शर्मा
वसवास-ए-फ़िक्री = overthinking
मरज़-ए-क़ल्ब = दिल का रोग


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







