ज़िंदगी की इस बात से, मुतासिर हूँ मैं..
खिज़ां में गिरा, तो बहारों में फ़िर हूं मैं..।
वो मुझसे, मुहब्बत से पेश आये न आये..
फ़ितरत-ए-जाँ की वज़ह से उनका मुंतज़िर हूं मैं..।
दिल तो अरमानों की, नई फ़ेहरिस्त लिए खड़ा है..
मंशा देखूँगा, यहां खुद ही ख़ुद का मुख़बिर हूं मैं..।
इस सफ़र की दास्तां मेरी शक्ल-ओ-सूरत बता देगी..
रास्तों से क्या शिकवा, दूर मंज़िल का मुसाफ़िर हूं मैं..।
ज़माना समझता है, मेरे दिल की ज़मीं है पुर -सुकूँ..
तबस्सुम लिए महफ़िल में, आंसुओं से कब्ल हाज़िर हूं मैं..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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