इतना भी नहीं होना है,
कि इश्क़ में पागल होना है,
जो मेरे पास है कम है,
पर इतनी भी कमी नहीं,
मैं पूरा हूँ,
तभी तुम्हें अलग से कमी दिखी है,
क्यूंकि कमियां अलग से दिखाई देती है,
जो हमारी होती नहीं,
हमारी पूर्णता इतनी है,
कि हम भीतर से ही सब पा लेते हैं,
संसार का सारा इश्क भी कम है,
मेरे भीतर के इश्क़ के आगे,
इसलिए ये जो तुमसे इश्क़ करता हूँ,
ये मेरा होश में इश्क़ है,
इस होश से इश्क़,
कभी भी किसी कमी को पूरा करने के लिए नहीं हुआ,
कमियां सिर्फ अलग से,
मेरे शरीर की परिधि से बाहर है,
उसे देखोगे तो,
कमियां मिलती हैं,
और मुझे देखोगे,
तो होश इश्क़ का दिखेगा।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







