"मैं वो लम्हा हूँ"
हम जो कह ना सके लफ़्ज़ों में,
वो ख़ामोशी का पैग़ाम हूँ,
जो बीत गए तेरे बिना,
मैं उन रातों का अंजाम हूँ।
सफ़र में कोई हमसफ़र मिला ही नहीं,
मैं तन्हा रास्तों का इंतज़ाम हूँ।
ठहर जाऊँ तो दुनिया रुक जाए,
मैं वक़्त का बे-लगाम हूँ।
टूटे हुए ख्वाबों को जोड़ने वाला,
मैं उम्मीद का सर-अंजाम हूँ।
उसकी आँखों में जो नमी देखी,
मैं उस नमी का ही नाम हूँ।
मैं वो धड़कन हूँ जो तेरे नाम से चले,
मैं तेरी साँसों का नीलाम हूँ।
छू ले मुझे तो सुलग उठे फ़िज़ा,
मैं इश्क़ का बे-इंतज़ाम हूँ।
राज़ जो दफ़न हैं सीने में, साँसों में,
इजाज़त हो तो कह दूँ, मैं वो इल्ज़ाम हूँ।
दर्द को भी मैंने हँस कर सी लिया,
मैं जख्मों का सबसे पुराना मरहम हूँ।
भूल जाए दुनिया गर मुझे, तो ग़म नहीं,
मैं उसके दिल का सबसे हसीं इनाम हूँ।
मिट भी जाऊँ तो फरिश्ते रो पड़ें,
मैं खुदा की लिखी कोई नाकाम दुआ का अंजाम हूँ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा,अरेराज ,पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







