हम कब हँसे कब टूटे मगर बिखरे नही।
गिराने की कोशिश करने वाले रहे नही।।
तकलीफों के बावजूद खुद सम्भले रहे।
हौसला के अलावा पास कोई रहा नही।।
हम स्त्रियाँ वाकई काबिले तारीफ होती।
ख्वाबों को जीना आज तक छोड़ी नही।।
जिन्दा लोगों को सहारे की जरूरत होती।
अपनों को अजनबी बनते देखा रोईं नही।।
वक्त ने बहुत कुछ हम से छीना 'उपदेश'।
मगर सबक क़ीमती दिया हम बदली नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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