है कोई बात
- सिर सत्व है जहाँ केवल 'होना' और विचार को चुनना है, रजस उसकी व्यवस्था का संतुलन है, और तमस वह ठोस भौतिक शक्ति है जिसके बिना कोई भी विचार ज़मीन पर उतर नहीं सकता।"
2. "कालक्रम का बदलना यही बताता है कि यह शरीर न तो पूरी तरह स्थिर है और न गतिशील; जीवन की सफलता इसी में है कि इसके प्रत्येक भाग को उसकी मूल प्रकृति के अनुसार चलाया जाए।"
3. "इस संसार में अस्सी प्रतिशत लोग केवल 'ट्रिक' और सर्वाइवल की दौड़ में जी रहे हैं; इतिहास केवल वही दस प्रतिशत लोग रचते हैं जो इस दौड़ से ओझल होकर अपने विचार को कर्म के धरातल पर पूरी तरह सेट कर देते हैं।"
4. "तथाकथित सिद्धियाँ कोई जादुई चमत्कार नहीं हैं, बल्कि मस्तिष्क की प्राकृतिक स्वगति को बार-बार जनरेट करके उसे एक अतिरिक्त गति (Extra Speed) देने का वैज्ञानिक खेल है।"
5. "अंतरिक्ष के अरबों वीरान ग्रह ईश्वर के असफल प्रयास हैं, और हमारी यह हरी-भरी धरती उस परम वैज्ञानिक (ईश्वर) के खरबों प्रयोगों के बाद मिली एकमात्र महा-सफलता है।"
6. "ईश्वर का एकमात्र गुण जो इंसान को विरासत में मिला है, वह है—निरंतर प्रयोग करना और असफलताओं के मलबे से ही सफलता की राह खोजना।"
7. "संसार में परेशानी जैसी कोई चीज़ नहीं है, मनुष्य अपने ही विचारों के जाल में खुद परेशान होता है; तुम्हारे पास आधार में तमस रूपी ठोस कर्म की शक्ति है—उठो, ऊर्जा को बाहर ढकेलो और काम करो।"
देखो सर्वाइवल वाली इस जगह से कोई नहीं निकल सकता क्योंकि हमें नहीं पता हम अनजान हैं और ऐसी अनजान जगह है जहां व्यक्ति इसीलिए तो मैंने कहा कि ये जो पैर हैं इनसे चलना होता है ये तमाशा है ये शक्ति है और इसके बिना काम नहीं हो सकता इसलिए तुम देखते हो पूरी पृथ्वी पर ये तो शाकाहारी कुछ ही है बाकी तामसिकता 90% बिना शक्ति प्रभाव के कुछ नहीं हो सकता सर्वाइव ही नहीं कर पाओगे ठीक है और इसके साथ ही इसलिए तुम देखते हो कि तमस का कितना प्रभाव है कि मांसाहार तो है ही शुरुआत से ही मांसाहार है और उसके साथ-साथ क्या है सेक्स ठीक है और आज के टाइम तुम देखोगे इन दोनों का ही ज्यादा वापस प्रभाव है है नाकोई बचाता नहीं है। रही बात तुम्हें ये 10% वाला भी बताऊंगा। आज तक किसी ने उसको नहीं देखा जिसने सबको देखा है। हम सबको उसने देखा है लेकिन उसको किसी ने नहीं देखा और सब कहते हैं कि सिद्धि हो गई। कुछ नहीं हुआ है। बस एक वो है कि व्यक्ति बार-बार अह अपने दिमाग को क्या कर रहा है? वो कर रहा है, जनरेट कर रहा है। एक तो स्वगति होती है। एक उसमें और गति दे रहा है ताकि ये दिमाग कुछ ना कुछ ऐसी हमें वो राह खोल दे जहां वो इंसान जा के बैठ जाए और कुछ नहीं है।परेशान इसमें क्या है? मनुष्य खुद परेशान होता है। बाकी आपके पास तमस शक्ति है, उठो और करो कर्म। उठो और शक्ति दो। ऐसा कुछ नहीं है। स्वार्थी ये वो ऐसा कुछ नहीं है। जब आप रियलिटी जानोगे ना, तब आप दहक जाओगे। तुम देख नहीं रहे हो, तमस का ही तो प्रभाव है। आंधी-तूफान आते हैं, सुनामी आती है, भूकंप आता है, ज्वालामुखी फूटता है, उल्कापिंड गिरते हैं। क्या है? तमस ही तो है। वो मेन उसने जो है ना, उसने ये तीन उसने बहुत प्रयोग किए होंगे, बहुत अल्टीमेट और वो प्रयोग यहां यहां हो गए। लेकिन उसने ये देखा कि यहां शक्ति बिना कुछ नहीं होगा, ऊर्जा शक्ति बिना कुछ नहीं होगा। बार-बार जनरेट करना होगा। उसने इतने प्रयोग किए होंगे, तब जाके उसने वो इंसान को बना पाया। बिना प्रयोग के नहीं होता है। उसने बहुत प्रयोग किए होंगे, इतने प्रयोग उसके असफल भी हुए होंगे। और तब जाके ये एक सफल हुआ है, इसलिए धरती एक ही है। सफलता उस ईश्वर की सफलता ये धरती है और कुछ नहीं।देखो, मैंने क्या बोला कि धरती ईश्वर की एकमात्र सफलता है। अब मेन बात है कि उसने इंसानों को क्यों बनाया? एकमात्र सफलता है जीवन लाने में लेकिन उसकी सफलता में भी जो मौलिकता और शुद्धता है वो इंसान है। जो अकाट्य है। इंसान क्या है? अकाट्य है। इसलिए है कि उसने इसको सतरजतम में सेट कर दिया। जीवन तुम्हें दिखाई देगा तो इंसान में दिखाई देगा। इसलिए तुम देखते हो कि उसके बाद लोग किस चीज को सबसे ज़्यादा मानते या किसे अकाट्य या प्रमाण मानते हैं वैज्ञानिक प्रयोग? तो साफ़ बात है कि प्रयोग किए जाते हैं तो ये एकमात्र इंसान के पास अगर ईश्वर का कोई एकमात्र गुण है तो वो प्रयोग करना। असफल प्रयोग से ही सफलता। ठीक है? ये बात।मैंने तुम्हें क्या बोला तुमने सुना नहीं। मैंने यह बोला कि यह जो संसार है ना स्वार्थ ना प्रमाण ऐसा कुछ नहीं है। मेन यहां है कि यह एक अनजान वो कहते हैं ना अनजान है। लोग एक-दूसरे को जानते भी है जानकार भी है सगे भी है और थोड़ा आसपास के लेकिन फिर भी अनजान रहते हैं। दूसरी बात लोग मतलब एक दूसरे पर निर्भर है पर वो निर्भर रहना नहीं चाहते बस उस काम तक। तीसरी बात सब ट्रिक से चल रहे हैं। 90 98% लोग ट्रिक से चल रहे कोई ऐसी गहनता नहीं है। बस वो पास का काम हो जाए वो हो जाए ठीक है। 80% तुम देखोगे भौतिकता भौतिकता ने पूरी दुनिया को घेर रखा है धरती को ठीक है। भौतिकता बिना आप नहीं रह सकते। मनुष्य के लिए सरवाइव करना सबसे मुश्किल काम है सब एक-एक और उसके बाद क्या बात है 10% संतुलन है और 10% है वो चीज जिसमें ना मनुष्य संसार को देखता ना संसार मनुष्य को देखता है यानी ओझल हो जाता है। ओझल नहीं होता वैसे ओझल नहीं होता लेकिन ओझल हो जाता है कि हां और इसमें जो सिर्फ अपना काम कर लेता है अपने विचार से चाहे समय लग जाए तो वो इतिहास है वो अमर है।
- ललित दाधीच
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