घड़ी देने वाला इंसान तो राह बदल गया,
पर उसकी दी हुई घड़ी हर पल साथ चल गया।
काश इंसान भी निभाते ऐसे ही रिश्ते,
तो वक़्त के साथ न टूटते अपने से अपने हिस्से।
घड़ी की वफ़ादारी तो ज़रा सुनो जनाब,
पानी में डुबो दो फिर भी चलता रहता हिसाब।
ना जाने कब से चल रही, थमी नहीं एक बार,
ऐसा ब्रांड कहाँ मिलेगा, जो निभाए हर इतवार।
काश इंसान का भी कोई ऐसा ब्रांड होता,
जिसका हाथ पकड़ो तो वो कभी न छूटता।
घड़ी की तरह चलता रहे रिश्ता बिना रुके,
ना वक़्त बदले, ना दिल बदले, ना अपने ही झुके।
काश वो भी घड़ी जितना वफ़ादार होता,
तो ज़िंदगी में कोई रिश्ता यूँ बेकार न होता।
— Gitanjali Gavel


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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