गीत गाते रहो गुनगुनाते रहो
खुशियां बरसेंगी तुम मुस्कुराते रहो।
जिंदगी के अंधेरे भी छट जाएंगे,
दुख के बादल घनेरे भी हट जाएंगे,
रोशनी सुख की फैलेगी चारों तरफ,
बुझती बाती के सर को उठाते रहो।
गीत गाते रहो गुनगुनाते रहो।
दुख ये कहता नहीं है कि सुख आएगा,
रात कहती नहीं है कि दिन आएगा,
घर के आंगन में सावन भी आ जाएगा,
प्यार के झूलों में दिल झुलाते रहो।
गीत गाते रहो गुनगुनाते रहो।
मत उजालों को पाने अंधेरे बनो,
तुम अंधेरे मिटाने उजाले बनो,
रात पूनम की हो या अमावस की हो,
दीप बनाकर सदां झिलमिलाते रहो।
गीत गाते रहो गुनगुनाते रहो।
झील गहरी बनो या समुंदर बनो,
नफरतों का नहीं प्यार का घर बनो,
हार भी मानकर हार रह जाएगी ,
जीत के गीत राहों में गाते रहो,
गीत गाते रहो गुनगुनाते रहो ।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट पीठ ग्वालियर
@सर्वाधिकार सुरक्षित रचनाकार


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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