ज़िंदगी बोली—चल तुझे रुलाती हूँ,
मैंने कहा—रुक, पहले चाय बनाती हूँ
मुसीबत बोली—तेरा क्या होगा?
मैंने कहा—तू अपना देख, मेरा तो जो होगा सो होगा
पैसे बोले—हमसे ज़्यादा उम्मीद मत रखना,
मैंने कहा—तुम भी रिश्तेदारों की तरह मत बदलना
दिल बोला—अब किसी से प्यार नहीं करेंगे,
दिमाग़ बोला—पहले EMI भरेंगे
लोग बोले—तुम बदल गई हो आजकल,
मैंने कहा—हाँ, अब बेवकूफ़ी का रिचार्ज नहीं करवाती हर पल
ज़िंदगी बोली—तेरी अकड़ तोड़ दूँगी,
मैंने कहा—पहले अपनी टेंशन की किस्त तो भर ले, फिर देखेंगे
अब हम दोनों का ग़ज़ब हिसाब है,
तेरे पास मुसीबतें, मेरे पास लाजवाब जवाब है
मुसीबत आई, दरवाज़ा खटखटाया,
मैंने अंदर से पूछा—कौन?
बोली—मैं परेशानी हूँ!
मैंने कहा—गलत घर, बहन
यहाँ पहले से बैठी हैं तीन-चार
ज़िंदगी—तू ड्रामा कर, मैं पॉपकॉर्न लाती हूँ,
तू मुझे रुलाने आना…
मैं हँसते-हँसते तुझे ही हँसाती हूँ


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







