फुर्सत के पल
मेरे लिए
केवल विराम नहीं,
एक प्रश्न हैं—
कि इतने वर्षों की यात्रा के बाद
मैं क्या हूँ
और क्या होते-होते
यहाँ तक पहुँचा हूँ।
जब जीवन, कर्तव्यों की भाषा में
मुझसे संवाद करता-करता थक जाता है,
तब ये पल प्रेम की तरह
चुपचाप पास आ बैठते हैं।
इन पलों में
मैं स्वयं को
नामों, पदों और उपलब्धियों से
अलग रखकर देखता हूँ—
न डॉक्टर,
न विद्वान,
बस एक व्यक्ति
जो अभी भी
अर्थ की तलाश में है।
रोमानी स्मृतियाँ
मन के आँगन में
दीपक-सी जल उठती हैं—
कभी किसी मुस्कान का स्पर्श,
कभी किसी अधूरे वाक्य की गूँज,
जो आज भी
हृदय को
कोमल बना देती है।
दार्शनिक मन पूछता है—
क्या प्रेम भी
ज्ञान का ही एक रूप है?
और क्या अकेलापन
आत्मा का
सबसे ईमानदार साथी?
फुर्सत के पल
मुझे यह सिखाते हैं
कि जीवन
उत्तर पाने की नहीं,
अनुभव करने की प्रक्रिया है।
और शायद
यही आत्मकथा है मेरी—
कि मैं
हर विराम में
थोड़ा-सा
खुद को लिखता हूँ,
और हर शुरुआत में
उसे
मुस्कराकर
स्वीकार कर लेता हूँ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







