मनखे मनखे चंग हें
परसा के फूल फूले,आंखी आंखी म झूले
देख देख हिरदे म,छावत उमंग हे
मस्ती म झूम झूम,बन बन म धूम धूम
मउहारी मतवारी, अजब-गजब गंध हे।
रुखवा रुखवा चार के,खड़े हें संवार के
नवा नवा दुलहिन के, लुगरा कस रंग हे
बेरा उवत चमकत हें, चारों डहर महकत हें
सरई के फूल ढावत ,गजब अपन रंग हे।
सोनहा फूल न्यारी न्यारी,आमा के डारी डारी
कोयली के कंठ में, प्रेम के तरंग हे
गांव गली एती ओती, बांचें नहीं कोनो कोती
घेरे अपन रंग म, फागुन मतंग हे।
भोला - पारबती के,माता सरसती के
पूजा अऊ अर्चना, सबों संगे संग हे
गांव गांव मेला ठेला,लोगन मन के रेलम पेला
राज ऋतुराज के हे,मनखे मनखे चंग हें।।
मनोज कुमार सोनवानी 'समदिल'
पोंड़ी, पाली, कोरबा छत्तीसगढ़
रुखवा -- पेंड़
चार- खट्ठा मीठा फल जिसकी चिरौंजी कलकंद जैसे महंगी मिठाइयों में डाली जाती है
मनखे मनखे -- व्यक्ति व्यक्ति
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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