बेचना चाहता बहुत कुछ अपना कहकर।
संगत सही न मिल सकी हवा में बहकर।।
आमदनी से ज्यादा खर्च मुकम्मल भूल है।
जाने क्या क्या चाहता वह सपना कहकर।।
गर्म रखेगा कब तलक रिश्ता किराये का।
भूगोल बदलेगा 'उपदेश' जमाना कहकर।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बेचना चाहता बहुत कुछ अपना कहकर।
संगत सही न मिल सकी हवा में बहकर।।
आमदनी से ज्यादा खर्च मुकम्मल भूल है।
जाने क्या क्या चाहता वह सपना कहकर।।
गर्म रखेगा कब तलक रिश्ता किराये का।
भूगोल बदलेगा 'उपदेश' जमाना कहकर।।
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