एक पल सुख से जीने दो
छोङो तुम ये मनमानी एक पल तो मुझ को जीने दो
छोङो तुम यह तृष्णाएं एक पल तो सुख से जीने दो
यूंही आपस में लङते रहे तो कैसे ये धरा बच पाएगी
मत चीरो धरती का सीना एक पल सुख से जीने दो
ये धरती और धन दौलत, सब रह जाता है यहीं पर
साथ नहीं कुछ भी जाता है इस को यहीं पे रहने दो
राजा रंक सभी दुनियां से खाली हाथ ही चले गए
तू क्या तेरी हस्ती क्या अब चैन से मुझको जीने दो
क्या तुम जीवन दे सकते हो ओ जीवन लेने वाले
छोङो अपनी ये हठधर्मी तुम सबको सुख से जीने दो
हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई रक्त एक सा है सब का
अधिकार एक से हैं सबके खुल कर सब को जीने दो
युद्ध से कर सकते हो तुम कब्जा केवल सीमाओं पर
दिल पर राज करो तो जानें मिल के सब को जीने दो
सत्य अहिंसा दया धर्म है आधार यही इस जीवन का
वसुधैव कुटुम्बकम को अपना कर सब को ही जीने दो
कितनी सम्पत्ति नष्ट हुई, जीवन कितने खाक हुए
तुमको दौलत से मतलब है कोई रोता है तो रोने दो
अपने स्वार्थ के लिए तुम, लङते आए हो सदियों से
रोको तुम इन युद्धों को, मत घूंट जहर का पीने दो
बार-बार युद्ध करके अब ये धरती कहां बच पाएगी
सांसों के थमने से पहले, एक पल मुझ को जीने दो
तुम अपने-अपने मसलों को मिल के हल करना सीखो
क्या कहें अब तुम्हें यादव सब को प्यार से जीने दो
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







