"ग़ज़ल "
इश्क़ को रूह की चाहत समझो
ज़ीस्त की ख़ुद पे इनायत समझो
ख़्वाब टूटे तो बिखरना कैसा
इसको तक़दीर की आदत समझो
जब चमक सच की गवाही न बने
वक़्त की चाल में हिकमत समझो
रिश्ते अल्फ़ाज़ के मोहताज नहीं
एक एहसास को कुर्बत समझो
ज़िन्दगानी के सफ़र से आगे
जो सफ़र है वो हक़ीक़त समझो
डॉ फ़ौज़िया नसीम 'शाद'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







