औरत को समझने में अजीब कशमकश होती।
बारिश की बूँदों जैसी होती हाथो में नही समाती।।
थोड़ी सी तवज्जो और सच्चा अपनापन चाहिए।
दिल तक पहुँचने के लिए चालाकियां नही भाती।।
एक कतरा मोहब्बत देने से पूरा समुन्दर लौटाती।
बाहर से जितनी मासूम उतनी अन्दर से नही होती।।
इज़्ज़त से बात करने पर भगवान का दर्जा देती।
बात बिगाड़ जाने पर भी उतनी तल्खी नही होती।।
रूठ जाने के वक्त 'उपदेश' सम्हालना कठिन होता।
मनाने पर अगर हँस पड़ती उतनी उलझी नही होती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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