मन में पलती आरज़ू, आँखों में विश्वास,
टूटे स्वप्नों से ही रचा, जीवन का इतिहास।
हर दिल के आँगन में, एक दिया चुपचाप,
जो जलता है अँधेर में, वही बने प्रकाश।
बीते कल की ठोकरें, बनीं आज पहचान,
हार-जीत के बीच ही, मन गढ़ता इंसान।
चलते-चलते थक गए, पथ ने ली परीक्षा,
हार न मानी फिर भी हमने, जीवन की यह शिक्षा।
छाया जब संदेह की, डगमग हुए क़दम,
धैर्य ने थामा हाथ तब, बढ़ा सफ़र हरदम।
धीरे-धीरे ही सही, भरता है हर घाव,
सब्र रखे जो आदमी, वही पाए हर ठाँव।
सच के संग जो चल पड़ा, काँटे हुए गुलाब,
मिले दर्द तो भी खिले, सपनों के कुछ ख़्वाब।
भीड़ चले जिस राह पर, वह ही सच हो जाए,
इतना साहस चाहिए, जो सच को ले बचाए।
जो मिला उसे मान लें, जो छूटा वह पाठ,
इन्हीं दोनों के बीच है, जीवन का सच्चा घाट।
पुस्तक से जो न मिले, वह जीवन सिखलाए,
अनुभव की एक चोट, सौ उपदेश बताए
भीड़ बहुत है जगत में, मन फिर भी अकेल,
जो स्वयं से हार गया, उसका कैसा खेल ।
मौन कभी कमजोरी नहीं, मौन भी है एक शस्त्र,
जहाँ शब्द घायल हो गए, बोल उठे तब अस्त्र।
कलम कहे अखिलेश की इतना ही प्रमाण,
ख़ुद को जान लिया अगर, पा लिया भगवान।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







