एक दीप जलाओ मन में भी,
कुछ अँधियारा कम होने दो।
केवल घर ही नहीं सजाना,
दिल में भी उजाला होने दो।
मिट्टी का दीप सिखाता है,
ख़ुद जलकर रोशन करना।
नफ़रत की दीवारें तोड़ो,
सबसे तुम मोहब्बत करना!
तेल भले ही कम हो जाए,
बाती फिर भी जलती है।
मुश्किल कितनी भी आ जाए,
हिम्मत राह बदलती है।
धन-दौलत से क्या मिलता है,
जब दिल में अँधियारा हो।
क्या फ़ायदा उस रौशनी का,
जब पड़ोसी बेचारा हो।
मंदिर-मस्जिद बाद में रखना,
पहले तुम इंसान बनो।
दीप जलाने से पहले तुम,
किसी के अरमान बनो।
एक दीप ग़रीब के घर में,
एक दीप विश्वास का!
एक दीप उस माँ के नाम,
जो दीपक है परिवार का।
आओ ऐसी ईद मनाएँ,
आओ ऐसी दिवाली हो।
हर चेहरे पर ख़ुशियाँ चमकें,
हर आँगन में खुशहाली हो।
— लेखक चौधरी बिलाल ✍️
टिडौली अम्बैहटा पीर
जिला _सहारनपुर उ०प्र


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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