अब तो रात ढ़ल चुकी आज भी वो नहीं आया
धुल गया काजल मेरा मगर अब तक नहीं आया
एक झलक दिखा कर मुझे जाने कहांँ खो गया
पूछा हवाओं से पहाड़ों चाँद तारों से बता नहीं पाया
रात भर मैं सुनती रही उसके हीं गाये ग़ज़ल
उसकी आवाज़ से भी दिल बहल नहीं पाया

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
अब तो रात ढ़ल चुकी आज भी वो नहीं आया
धुल गया काजल मेरा मगर अब तक नहीं आया
एक झलक दिखा कर मुझे जाने कहांँ खो गया
पूछा हवाओं से पहाड़ों चाँद तारों से बता नहीं पाया
रात भर मैं सुनती रही उसके हीं गाये ग़ज़ल
उसकी आवाज़ से भी दिल बहल नहीं पाया
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