दर्द
सिर्फ़ शरीर में नहीं होता,
कुछ दर्द
रूह की तहों में उतर जाता हैं।
जहाँ कोई मरहम नहीं पहुँचता,
कोई गोली असर नहीं करती,
और रात भर
नींद भी सिरहाने बैठी
चुपचाप रोती रहती है।
देखा है मैंने -
लोग दवा की शीशियों में
सुकून खोजते हैं,
पर असली राहत
कभी-कभी
एक अपने के स्पर्श में छिपी होती है।
एक सच्चा शब्द,
एक मौन साथ,
एक विश्वास भरी नज़र—
ये भी तो दवाइयाँ हैं,
जो बिना कीमत के
टूटे हुए मन को जोड़ देती हैं।
दर्द जब हद से गुजरता है,
तो इंसान
या तो पत्थर हो जाता है
या फिर कविता।
मैंने अपने हिस्से के आँसू
शब्दों में घोल दिए हैं,
ताकि जो भी इसे पढ़े
उसे लगे—
वह अकेला नहीं है।
हर पीड़ा के भीतर
एक धीमी-सी रोशनी होती है,
जो हमें सिखाती है
कि सहना भी
एक साधना है।
और शायद
दर्द की सबसे बड़ी दवा
दर्द को समझ लिया जाना है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







