मोहब्बत की दुकान
भाग–4
कमेंट करना चाहिए
हरिया – दरिया भाई नमस्कार, स्वागत है आपका मोहब्बत की दुकान में।
दरिया – हरिया भाई आपको भी धन्यवाद सहित सादर नमस्कार।
हरिया - दरिया भाई आज आप कुछ गम्भीर दिखाई दे रहे हो, इस कार्यक्रम में किस मसले पर प्रकाश डाल रहे हैं?
दरिया – हरिया भाई आज हम लिखनतु पर घटित हो रहे नवीनतम घटनाक्रम पर प्रकाश डालने वाले हैं।
हरिया - दरिया भाई लिखनतु पर अब क्या हुआ है और आप किस संदर्भ में जानकारी देने जा रहे हैं?
दरिया - हरिया भाई आज हम लिखनतु पर घटित हो रही एक विचित्र जानकारी देने जा रहे हैं, जो इस प्रकार रचनाएं प्रकाशित करने वालों के विषय में है ?
हरिया - दरिया भाई, आजकल लिखनतु पर एक अजीब सी स्थिति बन रही है। कुछ लोग लिखनतु छोङ कर जा चुके हैं और कुछ ऐसा करने की तैयारी कर रहे हैं।
हरिया - दरिया भाई यह बात सरासर गलत है, उन्हें ऐसा नही करना चाहिए? मगर ऐसा हुआ क्या है?
दरिया - हरिया भाई जब से अशोक जी का इंतकाल हुआ है कई महाशय उनकी विरासत को संभालने के लिए अपनी नजर गड़ाए बैठे थे, मगर लिखनतु आफिशियल को कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिल रहा था और जिसे वो ये विरासत सौंपना चाहते थे वो इसे स्वीकार नहीं कर रहे थे।
हरिया - दरिया भाई फिर ऐसा क्या हुआ?
दरिया - हुआ तो कुछ खास नहीं, बस लिखनतु आफिशियल ने इस विरासत को उस युवा लेखक को सौंप दिया जिसे वो लोग पसन्द नहीं था। कुछ लोगों ने लेखराम यादव से भी इस विरासत को संभालने का अनुरोध यह कह कर किया कि इसका संचालन किसी उम्र दराज और अनुभवी व्यक्ति को सौंप दिया जाए क्योंकि युवा हाथों के नीचे वो काम नहीं करना चाहते? कुछ एक सुझाव भी उनके द्वारा दिए गए, जिनमें से कुछ सुझाव स्वीकार भी किए गए।
हरिया - फिर इसमें बुरा क्या हुआ?
दरिया - जब कुछ लोगों की निदेशक बनने की ईच्छा पूरी नहीं हुई तो वे एक-एक करके चुपचाप खिसक गए।
हरिया - दरिया भाई क्या आप उनके नाम बता सकते हैं?
दरिया - हरिया भाई जो स्वार्थी थे वो चले गए क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ कर खुद को बुरा बनाना चाहते हो? अब छोड़िए भी, इससे लिखनतु आफिशियल को चार चांद तो लगने वाले नहीं हैं।
हरिया - दरिया भाई फिर आगे क्या हुआ?
दरिया - हरिया भाई होना क्या था, लिखनतु धीमी गति से ही सही पर चल तो सही रहा है।
हरिया - फिर अब आगे क्या करना होगा?
दरिया - हरिया भाई अब लिखनतु आफिशियल की कमान जिसके हाथों में है, उसे कुछ नया सोचना होगा और कुछ नया करना होगा?
हरिया - दरिया भाई इस सम्बन्ध में आप क्या सुझाव देंगे?
दरिया - हरिया भाई मेरा सोचना है कि लिखनतु के पास कई आप्शन हैं जैसे - लेखकों से सुझाव लेना, किसी नई श्रृंखला को शुरू करना, नए लेखकों को आकर्षित करने के लिए अनुरोध करना और विज्ञापन देना, मासिक पांच सर्व श्रेष्ठ रचनाओं का चयन करना आदि।
हरिया - दरिया भाई क्या आप कोई अन्य विकल्प भी सुझा सकते हैं?
दरिया - हरिया भाई हम लिखनतु कैनवस के नाम से दो अलग-थलग व्हाइट बोर्ड बना कर डिस्प्ले कर सकते हैं, जिस पर पूर्व पुरस्कार विजेताओं तथा प्रथम दो सर्व श्रेष्ठ रचनाओं के नाम लिख कर प्रदर्शित कर सकते हैं जो स्थाई रूप से लिखनतु डैशबोर्ड पर प्रदर्शित हों।
हरिया - वाह क्या बढ़िया सुझाव पेश किया है आपने, मजा आ गया।
हरिया - दरिया भाई ये तो लिखनतु आफिशियल के लिए आपने कहा, लेकिन हमारे लेखकों का भी तो कुछ दायित्व बनता है उसके बारे आप क्या कहेंगे?
दरिया - हरिया भाई हमारे लेखकों और रचनाकारों के भी कुछ दायित्व हैं जिनमें सबसे पहले उनका दायित्व है कि वे अपनी बेहतरीन से भी बेहतरीन रचनाएं लिखकर पेश करें ताकि पाठकों का भरपूर मनोरंजन हो, दूसरे उन्हें ऐसी रचनाएं नहीं भेजनी चाहिए जिनसे किसी व्यक्ति, देश,धर्म, जाति, समुदाय या समूह, समाज, संगठन या पार्टी का अपमान होता है या उनकी किसी प्रकार की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
हरिया - दरिया भाई एक रचनाकार को और क्या करना चाहिए?
दरिया - हरिया भाई सभी लेखकों और पाठकों को चाहिए कि वे परस्पर हर रचनाकार की रचना का सम्मान करे, मन में आत्मसात करे, मन से स्वीकार करे और पढ़ने के बाद दो शब्द कमेंट के रूप में लिख कर उसका हौंसला बढ़ाए ताकि अगली बार वह आपके लिए बेहतरीन रचना पेश कर सके।
हरिया - दरिया भाई अगर वे ऐसा न करें तो क्या होगा?
दरिया - हरिया भाई एक नए लेखक हतोत्साहित हो सकता है जिससे उसकी लेखन यात्रा रूक सकती हैऔर भविष्य में रचना पढ़ने को नहीं मिलेंगी दूसरी तरफ जो रचनाकार स्वंय की रचना पर तो लाईक और कमेंट चाहते हैं मगर खुद किसी की रचना पर कमेंट नहीं करते उनकी रचनाओं पर कमेंट कौन करेगा? अतः सभी रचनाकारों का कर्तव्य है कि वो रचना पढ़कर उस पर कमेंट अवश्य करें।
हरिया - दरिया भाई मैंने महसूस किया है कि कुछ लोग अहंकार वश कमेंट नहीं करना चाहते, क्योंकि वे दूसरों की रचना से अपनी रचना को श्रेष्ठ समझते हैं?
दरिया - हरिया भाई सही कहा आपने, कुछ लोग तो सुपीरियोरटी काम्प्लेक्स की भावना से ग्रसित हैं वे दूसरों की रचनाओं पर कमेंट नहीं करते, भले ही दूसरे रचनाकारों की रचना श्रेष्ठ न हो मगर उसे हौंसला अफजाई की जरूरत होती है, इसलिए कमेंट करना चाहिए, अगर ऐसा न करेंगे तो वो लोग भी आपकी रचना पर कमेंट क्यों करेंगे?
हरिया - दरिया भाई आपने तो सचमुच बहुत ही सुंदर और रौचक जानकारी देकर हमें कृतार्थ कर दिया, अच्छा तो आज आप हमारे पाठकों और लेखकों को नया क्या सुनाने जा रहे हो?
दरिया - हरिया भाई आज तो बस एक मुक्तक सुनाने का मन कर रहा है, लीजिए पेश है –
हर रचना को पढ़ कर, कमेंट करना चाहिए
करके कमेंट हरेक का हौंसला बढ़ाना चाहिए
मायने रखता है बहुत कमेंट किसी के लिए
ये सोच कर रचना पर कमेंट करना चाहिए
हरिया - वाह दरिया भाई, वक्त और हालात पर क्या कमाल का मुक्तक सुनाया है, मजा आ गया, उम्मीद है हमारे पाठकों और लेखकों को भी पसन्द आया होगा। यहां पर तशरीफ लाने के लिए आप सब का बहुत बहुत हार्दिक स्वागत एवं धन्यवाद।
दरिया - हरिया भाई सभी पाठकों एवं लेखकों के साथ-साथ आपका भी बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद।
( शेष अगले भाग में…..)
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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