शेर जा रहा था तेजी से
मन में लिए पूर्व कर्मों का अफसोस..
तभी सामने से दिख पड़े
मिस्टर मासूम खरगोश..
देख के शेर महाराज को उड़े उसके होश..
हाथ पैर कंपित हुए, ठंडा पड़ा सब जोश
हाथ जोड़ आशीष करी
हमें बख्श दीजिए नहीं हमारा दोष..
तभी चमत्कार घटा, चरणों में गिरे शेर..
बोले हम आ रहे थे हुई जरा बस देर..
बोले इस चुनाव में हम भी खड़े हैं..
हम इक अदने से शेर, आप हमसे बड़े हैं..
हमारी मान मर्यादा अब आपके हाथ है बोस..आप प्लीज़ रोइए मत
मेरा चुनाव चिन्ह है,
"हंसता हुआ खरगोश"..
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







