मनाने का मौका तक नही दिए
इतने रूठ गये
बताओ अब जिएं तो कैसे जिएं
इतने रूठ गये!
हमारी सांसों में सिर्फ तुम्हारी यादें हैं
हमें, जीने की, ऐसी सजा दे दिए
इतने रूठ गये!
बड़ों के सवालों में छोटों का भला है
ये रीत भी,साथ लेकर ,चल दिए
इतने रूठ गये!
कयासें, मन्नतें, तड़पना,सब बेकार
सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिए
इतने रूठ गये!
जिंदगी हमारी अब बोझ बन गई
बता भी दो,हम सब कैसे जिएं
इतने रूठ गये!!
तुमने खुद को, हमसे छीन लिया
बताओ तुम्हारे बिन,अब कैसे जिएं
इतने रूठ गये!!
बेटे हम ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि वो तुम्हारी सारी गलतियों को क्षमा करे और तुम्हें अपने चरणों में स्थान दें!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







