दिल-ए-एहसास ख़ास लगता है,
चाँद मेरा उदास लगता है।
रात की तीरगी में डूबा दिल,
तेरा हर लफ़्ज़ रास लगता है।
अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी,
हर ख़ुशी इक क़यास लगता है।
दिल के वीरान से मकानों में,
ख़ुद का होना निवास लगता है।
अहमियत कौन समझे पर्दे की,
हर कोई बे-लिबास लगता है।
“
शाद” इस दिल का हाल क्या कहिए,
हर सुख़न भी उदास लगता है ।
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







