एक सोच के घेरे में अब तक उलझे थे
कि दुखी मन कभी हँस नहीं सकता,
पर देखा है हमने
हँसते हुए वो चेहरे
जो दिल में दर्द का सैलाब लिए घूमते हैं।
देखी है हमने
वात्सल्य से भरी
मुस्कुराती हुई वो आँखें
जिनके सूखे आँसुओं में
आज भी अपनों का कहीं इंतज़ार है।
सुनी है हमने
यादों की कहानियों में डूबी हुई चहकती वो बातें
जिनका वक्त कहीं पीछे
किसी अपने के जाने से ठहर चुका है
जो जी नहीं रहे,बस उनकी सांसें चल रही हैं।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







