चाँद के सवालों में रात के उजालों ने,
मेरे दिल में क्या ढूंढ़ा,
मैं सारे शहर को जगाने लगा,
मुझे सारा शहर सताने लगा,
आदमी हूँ मैं कोई साजिश नहीं हूँ,
प्यार हुआ मैं तो करना पड़ा था,
ज़ख्मों का सौदा करना पड़ा था,
साथी हूँ मैं कोई झूठी बाज़ी नहीं हूँ,
तेरे साएं के हवाले हूँ मैं अनजानी उधारी हूँ,
तुमको चाहने का जो पाठ पढ़ा हूँ मैं,
तुमको दिल लिखने वाला हूँ मैं,
तेरे बिना मैं क्या करूंगा,
जिंदगी से क्या बहाने कहूंगा,
चाँद के सवालों में रात के उजालों ने,
मेरे दिल में क्या ढूंढ़ा,
मैंने अपने लिए क्यों अंधेरा रखा,
तुझसे जुड़ के देख मेरा क्या हुआ,
मैं सारे शहर को जगाने लगा,
मुझे सारा शहर भगाने लगा
मुझे सारा शहर सताने लगा।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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