बोझ हमपे न डालो हमारा प्रिये
चाहता हूँ मैं खुद से किनारा प्रिये
हो गया हूँ मैं बोझिल तन - मन से अभी,
दे सको तो अभी दो सहारा प्रिये
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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बोझ हमपे न डालो हमारा प्रिये
चाहता हूँ मैं खुद से किनारा प्रिये
हो गया हूँ मैं बोझिल तन - मन से अभी,
दे सको तो अभी दो सहारा प्रिये
-सिद्धार्थ गोरखपुरी
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