बालाजी मारा कारज कर ला,
बालाजी मारा कारज कर ला,
देवरों, मंदिर हो या पूजाघर घर में हो,
तन में हो मन में हो या गहरे घन में हो,
पर, बालाजी मारा कारज कर ला,
बालाजी मारा कारज कर ला,
इतना क्या राममय हो,
इतनी रामधुन क्यों करते हो,
कि धुन भी राम में ही घूमी रहे,
इतनी धूणी राम की कहाँ से कहाँ हो जाते हो,
मैं भी हूँ परदेशी,
वापिस देश जाना है,
मेरी धुन ने हाथ बढ़ाया,
अब तुम भी अपनी धुन हाथ पकड़ो,
बीच में राम साथ हो,
बस यही नाथ हो,
पर, बालाजी मारा कारज कर ला,
मैं नहीं है छुपा,
पर छुप छुप के देखता है,
तू तो देखें,
पूरा सरोवर,
पर प्राण देखें अपने बाहर अंदर,
सबको देखें तब सभी दिखें है,
एक एक देखकर,
तू खोता नहीं है,
मुझे भी देख,
बस वही नजर,
जो सब पर आएगी,
पर, बालाजी मारा कारज कर ला,
बालाजी मारा कारज कर ला।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







