भाग-भाग कर पैर दुखे,
रोम-रोम तक काँप उठा।
पर आया एक ऐसा दिन,
सपना हुआ सच मेरा,
उस दिन मैंने कसम खाई –
भारत माता की सेवा करूँगा,
चाहे जितनी मुश्किलें आएँ।
आज वही मुश्किलें आईं,
छिड़ गई एक बड़ी लड़ाई।
उसमें मैं शहीद हुआ,
घरवालों ने रो-रो कर आँसू बहाए।
घरवालों से हमेशा दूर रहा,
अपनी माँ के हाथों का खाना न खा पाया,
पर भारत माँ की सेवा करता रहा।
सेवा करते-करते शहीद हुआ,
शहीद होकर घर पहुँचा।
यही तो हमारी ज़िन्दगी है भाई,
हम हैं भारतीय सेना के जवान।
✍️ लेखक – आकाश कुमार साह


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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