सादे जीवन की ,
साफ-सुथरी राहें,
न कोई भीड़-भड़क्का,
न किसी की आहें !
थक जाओ अगर तुम,
भीड़-भड़क्की राहों में,
याद करना आवाज देकर,
अक्सर अकेले होते है हम !
✒️ राजेश कुमार कौशल

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
सादे जीवन की ,
साफ-सुथरी राहें,
न कोई भीड़-भड़क्का,
न किसी की आहें !
थक जाओ अगर तुम,
भीड़-भड़क्की राहों में,
याद करना आवाज देकर,
अक्सर अकेले होते है हम !
✒️ राजेश कुमार कौशल
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