कुछ लोग दुनिया में मेरे जैसे भी बदनशीब होते होंगे
ग़र जीना चाहे तो मरते होंगे और मरने पे जीते होंगे
बड़ा निराश किया हमकों इन ख़ुदखुशी के फंदो ने
बदकिस्मत लोग फिर भी इनको ही आज़माते होंगे
आँखे सूज के लाल हुई फिर भी क्यूँ अश्क़ बेईमान
पता नहीं और कितना दर्द क़ो अहसान जताते होंगे
पागल सें हुए तेरे झूठे इश्क़ की झूठी बातो सें जानाँ
तुम कितनो सें झूठे इश्क़ की झूठी कमसे खाते होंगे
दिल में दबा के रखती हूँ अपने क़ीमती ज़ज़्बात क़ो
और फिर भी बिना सोचे पत्थर दिल की बुलाते होंगे
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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