एक ही शहर में थे
एक ही शाम थी
तू मेरे सामने थी
बस मेरी नजर नहीं....
बस ऐसे ही
तुमसे मिलना जुलना छोड़ दिया
बस ऐसे ही
तुमसे बात करना छोड़ दिया
बस ऐसे ही
तेरी तरफ देखना छोड़ दिया
बस ऐसे ही
तेरा इंतजार करना छोड़ दिया
दिल वहीं ठहरा था
वक्त ही गुजर गया
तू तो वहीं की वहीं थी
मैं ही खुद से गुजर गया.....
बस ऐसे ही
तेरी गली से गुजरना छोड़ दिया
बस ऐसे ही तेरा नाम होठों पे लाना छोड़ दिया
बस ऐसे ही तेरी तरफ मुस्कुराना छोड़ दिया
बस ऐसे ही
तेरी आंखों में ठहरना छोड़ दिया


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







