हर रोज़ कुछ और, राहें बन्द हो रही..
राहें तकते-तकते निगाहें बंद हो रही..।
हम सुनायें भी दास्ताँ, तो सुनाएँ किसे..
कुछ कदम चलकर, सदायें बंद हो रही..।
शज़र के बदन पे चलने लगी हैं आरियां..
शाखों पे परिंदों की, पनाहें बंद हो रही..।
विरह का नग़मा, गाया न गया हमदम..
उम्मीद-ए-दामन छूटा,आहें बंद हो रही..।
कुदरत के पैकर में, रस-ए-ज़िंदगी नहीं..
जो खुली थी, अब वो बाहें बंद हो रही..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







