बनावट के दोस्तों से,
बेहतर हैं बहोत तनहाइयाँ !!
बनावट की आशिक़ी से,
बेहतर हैं बहोत रूसवाइयाँ !!
क्या मिलेगा झूठे लोगों से,
दिल लगाकर के मेरे यारो !!
क्या मिलेगा ख़ाली कमरे को
कबाड़खाने बनाकर के दोस्तों !!
बनावट के मेहफ़िलों से,
लाख बेहतर हैं रूसवाइयाँ !!
रंगमहलों के मोह छोड़ो,
सन्नाटे वहाँ आजकल गूँजते!!
जोड़ लो रिश्ता सादगी से,
खुश हो जायेंगे फरिश्ते !!
बनावट के चाहतों से,
बेहतर हैं बहोत दुश्वारियाँ !!
- वेदव्यास मिश्र
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