बहती हवाओं ने
पैग़ाम दिल को दिया है
हमने खुद अपने हाथों से
प्रकृति में रंग भर दिया है
हर तरफ हरे-भरे
लहलहाते...........
पेड़ फल फूल पौधों का
सृजन किया है
मस्त हवा का झोंका
बनकर
खुशियों का कमल
खिला दिया है
हर तरफ मौसम देखो
खिला-खिला है
चलती हवाओं ने
पैग़ाम दिल को दिया है
फलक से जमीं तक
मेरी ही हस्ती है
सांस मेरे बिना
कहां किसी की चलती है
मैं अनोखी हवा हूँ
मेरी बात ही........
अनूठी,अलबेली है
खुशबू बिखेरती प्रकृति
कितनी खिली-खिली है
मैनें अपने हाथों से......
प्रकृति की सोलह
श्रृंगार किया है
बसंती हवा हूँ मैं
हर तरफ..........
खुशियां बिखेर दिया है
प्रकृति की सांस हूँ मैं
सबकी आस हूँ
मंद-मंद बहती हूँ
शीतलता सबको देती हूँ
बहती हवाओं ने
पैग़ाम दिल को दिया है
हमने खुद अपने हाथों से
प्रकृति में रंग भर दिया है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







